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हारुन का निशान : 1 गाय 2 बकरियां

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हम ने मूसा के निशान 2 में देखा था कि जो अहकाम सीना पहाड़ पर दिए गए थे वह बहुत सख्त थे ।  मैं ने आपको दावत दी थी कि आप खुद से सवाल करें ।  क्यूंकि यह अहकाम का मामला है कि आप हमेशा अहकाम की पाबन्दी करते हैं कि नहीं ।  अगर आप हमेशा अहकाम की पाबंदी करते हैं तो आप और मैं संजीदा तोर से मुसीबत में हैं मतलब यह कि आप इंसाफ़ की पकड़ में हैं (शिकनजे में हैं)। अगर ऐसी बात है तो क्या किया जा सकता है ? (हारुन मूसा का बड़ा भाई था)। और उसकी औलाद ने भी कुर्बानगाह की ख़िदमत पर सवालिया निशान खड़े किये थे । और यह कुर्बानियां कफ्फारा बतोर थीं या गुनाह ढांके जाने बतोर थे ।  हारून दो तरह की क़ुर्बानी गुज़रानता था । वह इस बात को समझने के निशान थे कि किस तरह अल्लाह उन गुनाहों को ढँक देगा जब कोई शख्स अहकाम को तोड़ेगा ।  यह एक बछड़े और दो बकरियों की क़ुर्बानी थी ।  हारुन के गाय की क़ुरबानी को अंजाम देने की बाबत ही कुरान शरीफ़ के दुसरे सूरा का नाम सूरा अल ।  बक़रा रखा गया है ।  मगर आइये हम बकरियों से शुरू करते हैं।

(क़ुर्बानी) नज़र का बकरा और कफ़फ़ारे का दिन 

हज़रत मूसा के निशान 1 से फ़सह की बाबत जो हम ने देखा था वह आज भी फ़िरोन से छुटकारे की याद में यहूदी लोगों के ज़रिये मनाया जाता है ।  मगर तौरेत ने इस के साथ ही दीगर ईदों को भी मनाने का हुकम दिया । उन में से जो ख़ासुल ख़ास था वह था कफ़फ़ारे का दिन ।  तौरात में इस पूरे बयान को पढने के लिए यहाँ पर किलिक करें ताकि इस पूरी इबारत को पढ़ सकें ।

इसे क्यूँ बड़ी होशियारी से तफ़सील के साथ कफ़फ़ारे के दिन के लिए हिदायत दी गई थी ? हम देखते हैं कि यह किसतरह शुरू होता है :

   हारून के दो पुत्र यहोवा को सुगन्ध भेंट चढ़ाते समय मर गए थे। फिर यहोवा ने मूसा से कहा, “अपने भाई हारून से बात करो कि वह जब चाहे तब पर्दे के पीछे महापवित्र स्थान में नहीं जा सकता है। उस पर्दे के पीछे जो कमरा है उसमें पवित्र सन्दूक रखा है। उस पवित्र सन्दूक के ऊपर उसका विशेष ढक्कन लगा है। उस विशेष ढक्कन के ऊपर एक बादल में मैं प्रकट होता हूँ। यदि हारून उस कमरे में जाता है तो वह मर जायेगा!

अह्बार 16:1-2

इस से पहले क्या वाक़िया पेश आया था जब हारून के दोनों बेटे एक साथ मर गए थे ।  जब वह बे धड़क पाक्त्रीन मुक़ाम में दाखिल हो गए थे जहां खुदावंद की हुज़ूरी सुकूनत करती थी ।  मगर (जैसे हम यहाँ देखते हैं कि) पूरी तरह से हुक्म की पाबन्दी न करने के अंजाम बतोर उन पर मौत वाक़े हुई ।  क्यूँ ? इसलिए कि उस पाक तरीन मुक़ाम में (ताबूत) यानी अहद का संदूक रखा गया था जो ख़ुदा की पाक हुज़ूरी की निशानी थी ।  कुरान शरीफ़ भी इस अहद के संदूक का ज़िक्र करता है ।  वह कहता है :

 और उन के नबी ने उनसे ये भी कहा इस के (मुनाजानिब अल्लाह) बादशाह होने की ये पहचान है कि तुम्हारे पास वह सन्दूक़ आ जाएगा जिसमें तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तसकीन दे चीजें और उन तब्बुरक़ात से बचा खुचा होगा जो मूसा और हारुन की औलाद यादगार छोड़ गयी है और उस सन्दूक को फरिश्ते उठाए होगें अगर तुम ईमान रखते हो तो बेशक उसमें तुम्हारे वास्ते पूरी निशानी है

सूरा 2:248अल – बक़रा

जिसतरह यह सूरा कहता है यह ‘अहद का संदूक’ जिसको शहादत का संदूक भी कहा जाता है य्हिख्त्यार का निशान  था ।  क्यूंकि यह संदूक मूसा की शरीअत के अहद का निशान था ।  इस संदूक के अन्दर शरीअत के दस अहकाम की पत्थर की लोहें रखी हुई थी । इस अहद के संदूक की हुज़ूरी में जो भी कोई अहकाम को तोड़ता था वह मर जाता था । हारुन के बेटे बेधड़क पाक्त्रीन मक़ाम में घुस आए थे इस लिए वह मर गए थे । इस लिए एहतियात के साथ हिदायत दी गई थी जिस में यह भी शामिल था कि हारुन साल में एक मर्तबा बैलों और बकरियों का खून लेकर दाखिल होता था । इसी दिन को कफ़फ़ारे का दिन कहा जाता था ।  हारुन या और कोई सरदार काहिन को उस दिन के अलावा किसी दुसरे दिन उस पाक तरीन मकाम में दाखिल होने की इजाज़त नहीं थी ।  ऐसा करने पर उस के लिए मौत ठहराई गई थी ।  मगर कफ़फ़ारे के एक दिन पहले हारून अहद के संदूक के सामने हाजिर हो सकता था ताकि क़ुर्बानी की रसम को अंजाम दे ।  देखें

 

तब हारून बैल की पापबलि चढ़ाएगा। यह पापबलि उसके अपने लिए और उसेक परिवार के लिए है। तब हारून वह उपासना करेगा जिसमें वह और उसका परिवार शुद्ध होंगे।“इसके बाद हारून दो बकरे लेगा और मिलापवाले तमबू के द्वार पर यहोवा के सामने लाएगा। हारून दोनों बकरों के लिए चिट्ठी डालेगा। एक चिट्ठी यहोवा के लिए होगी। दूसरी चिट्ठी अजाजेल के लिए होगी।“तब हारून चिट्ठी डालकर यहोवा के लिए चुने गए बकरे की भेंट चढ़ाएगा। हारून को इस बकरे को पापबलि के लिये चढ़ाना चाहिए। 10 किन्तु चिट्ठी डालकर अजाजेल के लिए चुना गया बकरा यहोवा के सामने जीवित लाया जाना चाहिए। याजक उसे शुद्ध बनाने के लिये उपासना करेगा। तब यह बकरा मरुभूमि में अजाजेल के पास भेजा जाएगा।11 “तब हारून अपने लिये बैल को पापबलि के रूप में चढ़ाएगा। हारून अपने आप को और अपने परिवार को शुद्ध करेगा। हारुन बैल को अपने लिए पापबलि के रूप में मारेगा। 12 तब उसे आग के लिए एक तसला वेदी के अंगारों से भरा हुआ यहोवा के सामने लाना चाहिए। हारून दो मुट्ठी वह मधुर सुगन्धि धूप लेगा जो बारीक पीसी गिई है। हारून को पर्दे के पीछे कमरे में उस सुगन्धित को लाना चाहिये। हारून को यहोवा के सामने सुगन्ध को आग में डालना चाहिए। 13 तब सुगन्धित धूप के धुएका बादल साक्षीपत्र के ऊपर के विशेष ढक्कन को ढक लेगा। इस प्रकार हारून नहीं मरेगा।

अह्बार 16: 6,13

सो एक बछड़े को ज़बह करना होता था ताकि वह अपने ख़ानदान के ख़ता लिए कफ़फ़ारा दे सके ।  फिर वह दो बकरों का रस्म अदा करता था ।

“इसके बाद हारून दो बकरे लेगा और मिलापवाले तमबू के द्वार पर यहोवा के सामने लाएगा। हारून दोनों बकरों के लिए चिट्ठी डालेगा। एक चिट्ठी यहोवा के लिए होगी। दूसरी चिट्ठी अजाजेल के लिए होगी।“तब हारून चिट्ठी डालकर यहोवा के लिए चुने गए बकरे की भेंट चढ़ाएगा। हारून को इस बकरे को पापबलि के लिये चढ़ाना चाहिए।

अह्बार 16:7-9

एक बार उस बछड़े की क़ुर्बानी के बाद हारून दो बकरों को लेकर उन दोनों पर कुरा डालता था कि कौनसा क़ुर्बानी के लिए है और कौन सा अज़ाज़ील के लिए है ।  कुरा निकलने के बाद अज़ाज़ील के बकरे को बयाबान में छोड़ दिया जाता था और क़ुर्बानी वाले बकरे को खता की क़ुर्बानी बतोर ज़बह किया जाता था ।  क्यूँ ?

15 “तब हारून को लोगों के लिए पापबलि स्वरूप बकरे को मारना चाहिए। हारून को बकरे का खून पर्दे के पीछे कमरे में लाना चाहिए। हारून को बकरे के खून से वैसा ही करना चाहिए जैसा बैल के खून से उसने किया। हारून को उस ढक्कन पर और ढक्कन के साने बकरे का खून छिड़कना चाहिए। 16 ऐसा अनेक बार हुआ जब इस्राएल के लोग अशुद्ध हुए। इसलिए हारून इस्राएल के लोगों के अपराध और पाप से महापवित्र स्थान को शुद्ध करने के लिए उपासना करेगा। हारून को ये काम क्यों करना चाहिए क्योंकि मिलापवाला तम्बू अशुद्ध लोगों के बीच में स्थित है।(अ)

ह्बार 16:15-16

और नज़र के बकरे का क्या होता था ?

20 “हारून महापवित्र स्थान, मिलापवाले तम्बू तथा वेदी को पवित्र बनाएगा। इन कामों के बाद हारून यहोवा के पास बकरे को जीवित लाएगा। 21 हारून अपने दोनों हाथों को जीवित बकरे के सिर पर रखेगा। तब हारून बकरे के ऊपर इस्राएल के लोगों के अपराध और पाप को कबूल करेगा। इस प्रकार हारून लोगों के पापों को बकरे के सिर पर डालेगा। तब वह बकरे को दूर मरुभूमि में भेजेगा. एक व्यक्ति बगल में बकरे को ले जाने के लिए खड़ा रहेगा। 22 इस प्रकार बकरा सभी लोगों के पाप अपने ऊपर सूनी मरुभूमि में ले जाएगा। जो व्यक्ति बकरे को ले जाएगा वह मरुभूमि में उसे खुला छोड़ देगा।

अह्बार 16:20-22

बछड़े कि क़ुर्बानी तो हारून के खुद के लिए और उसके ख़ानदान के लिए था और उस पहले बकरे की क़ुर्बानी तमाम बनी इस्राईल के गुनाहों के लिए था । फिर दुसरे बक्रेव पर हारून अपने दोनों हाथ रखता था । वह नज़र का बकरा निशान बतोर होता था जिस पर बनी इस्राईल के तमाम गुनाह लादे हुए बयाबान में घूमता फिरता था ।  जो उसे बयाबान में छोड़ने जाता था उस को वापस आकर गुसुल करना होता था । इन रस्मों और कुर्बानियों के वसीले से गुनाहों का कफ़फ़ारा होता था ।  ऐसा हर साल कफ़फ़ारे के दिन मनाया जाता था ।

बछिया या गाय  सूरा – ए – बक़रा और तौरात में

हारुन इस बछिए (नर बछड़े के बदले मादा गाय) की क़ुर्बानी के अलावा दीगर कुर्बानियां भी गुज़रानता था ।  इस बछिए की क़ुर्बानी के सबब से ही सूरा का नाम सूरा । ए।  बक़रा रखा गया जो कि क़ुरान शरीफ़ का दूसरा सूरा है ।  सो क़ुरान शरीफ़ बराहे रास्त इस क़ुर्बानी की बाबत कहता है ।  यहाँ किलिक करें ताकि आप इस बयान को पढ़ सकें । जिस बतोर आप देख सकते थे कि लोग उस वक़्त चोंक गए थे और उलझन में पड़ गए थे जबुन्हें गाय की क़ुर्बानी का हुक्म दिया गया था (यानी कि मादा जानवर की क़ुर्बानी) जब कि आम तोर पर नर जानवर की क़ुर्बानी दी जाती थी । और यह ख़त्म होता है ज़ेल के सूरा में ।

 खुदा को उसका ज़ाहिर करना मंजूर था पस हमने कहा कि उस गाय को कोई टुकड़ा लेकर इस (की लाश) पर मारो यूँ खुदा मुर्दे को ज़िन्दा करता है और तुम को अपनी कुदरत की निशानियाँ दिखा देता है

सूरा 2:73 अल –  बक़रा

सो यह भी कई एक निशानों में से एक निशान है जिस पर धियान देने कि ज़रुरत है कि यह बछिया किस बात का निशान है । हम ने पढ़ा था कि ज़िन्दगी और मौत से इस का ता’ललुक़ है ।  “इत्तिफ़ाक़न हम इसे समझ सकते हैं”जब हम तौरात में असली हिदायत का मुताला करते हैं तो हारुन की इस क़ुर्बानी की बाबत पढने को मिलता है । यहाँ पर किलिक करें ताकि इस पूरे इबारत को तौरात में से पढ़ सकें । हम देखते हैं कि :

 बछिया को जलाया जाना है – उसके छिपने, मांस, रक्त और आंतों को। पुजारी को कुछ देवदार की लकड़ी, हाईसोप और स्कारलेट ऊन लेना है और उन्हें जलती हुई बछिया पर फेंकना है

गिनती 19 : 5 – 6

ज़ूफ़े  की लकड़ी एक पत्तों वाला दरख़्त है ।  जहां तक ज़ुफे का सवाल है फ़सह के दौरान जब बनी इस्राईल को फ़सह के बर्रे का खून घर के चौखट पर छिड़कना था तो ज़ूफ़े का इस्तेमाल किया जाता था जिस से मौत का फ़रिश्ता उस घर को छोड़ता जाए ।

22 जूफा [b] के गुच्छों को लो और खून से भरे प्यालों में उन्हें डुबाओ। खून से चौखटों के दोनों पटों और सिरों को रंग दो। कोई भी व्यक्ति सवेरा होने से पहले अपना घर न छोड़े।

ख़ुरूज 12:22

ज़ूफ़े को उस बछिए के साथ भी इस्तेमाल किया गया । और बछिया , ज़ूफ़ा , ऊन , और देवदार इन सब को तब तक जलाया जाता था जब तक कि सिर्फ़ राख ही राख रह जाता था । देखें :

“एक आदमी जो साफ है वह बछिया की राख को इकट्ठा करेगा और उन्हें शिविर के बाहर एक औपचारिक रूप से साफ जगह पर रखेगा। उन्हें इज़राइली समुदाय द्वारा सफाई के पानी में उपयोग के लिए रखा जाना है; यह पाप से शुद्धिकरण के लिए है।

गिनती 19:9

फिर उस राख को ‘पाक किये जाने के पानी में’ मिलाया जाता था ।  एक नापाक शख्स इस सफ़ाई (रस्मी ग़ुसल या वज़ू) को अंजाम देता था ताकि राख मिले हुए पानी को इस्तेमाल करके सफ़ाई से बहाल हो जाए ।  मगर राख अकेला किसी गंदगी को साफ़ करने के लिए नहीं था ।

 “जो कोई भी इंसान की लाश को छूता है वह सात दिनों तक अशुद्ध रहेगा। उन्हें तीसरे दिन और सातवें दिन पानी के साथ खुद को शुद्ध करना होगा (बछिया की राख के साथ मिश्रित); तब वे साफ हो जाएंगे। लेकिन अगर वे तीसरे और सातवें दिन खुद को शुद्ध नहीं करते हैं, तो वे साफ नहीं होंगे। यदि वे मानव लाश को छूने के बाद खुद को शुद्ध करने में विफल होते हैं, तो वे यहोवा की झांकी को परिभाषित करते हैं।

गिनती 19 :11- 13

सो यह गाय की राख जो पानी में मिला हुआ था इस से वज़ू (सफ़ाई) होती थी ।  मगर सवाल यह है कि एक शख्स जब मुरदार जिस्म को छू लेता था तो मुरदार जिस्म को छूने से एक शख्स इतनी संजीदा तोर से क्यूँ नापाक क़रार दिया जाता था ? आप इस के बारे में सोचें ! आदम को एक फानी इंसान बनाया गया था ।  उस के गुनाह के अंजाम बतोर वह फ़ानी हुआ ।  और उसकी औलाद भी फ़ानी हुई (जिस में मैं और आप शामिल हैं) ।  इसलिए मौत एक नापाक चीज़ है क्यूंकि यह गुनाह का अंजाम है ।  यह गुनाह की नापाकी से शिरकत करती है ।  इसलिए जो मुर्दा जिस्म को छूता है तो वह खुद भी नापाक हो जाता है ।  मगर यह राख एक निशाँ थे कि इस नापाकी से पाक करे । एक नापाक शख्स जो अपनी ‘नापाकी’ में मुर्दा वह बछिया के राख के साथ नजासत से पाक होकर ‘ज़िन्दगी’ पाएगा

 एक मादा जानवर का इस्तेमाल क्यूँ किया गया और नर का क्यूँ नहीं ? इस सवाल के लिए कोई बराहे रास्त वज़ा हत नहीं दी गई है मगर हम कलाम से सबब निकाल सकते हैं ।  पूरे तौरात में (और दीगर तमाम मुक़द्दस किताबों में)अल्लाह ने खुद को मुज़क्कर के जिन्स में ज़ाहिर किया और बनी इस्राईल को मज्मूआ तोर से मुअननस के जिन्स  में ज़ाहिर किया गया है ।  अल्लाह ने इन को अपनी क़ौम कहा और इन की रहनुमाई की और उन्होंने जवाब दिया यानी उसकी रहनुमाई क़बूल की ।  मगर हमेशा हर बात में अल्लाह ने पहल की ।  उसी ने पहल करके इब्राहिम को हुक्म दिया था कि वह अपने बेटे को कुर्बान करे ; उसी ने पहल करके बनी इस्राईल के लिए दस अहकाम पत्थर की  लोहों पर लिखवाये; उसी ने पहल करके नूह के ज़माने के लोगों का इंसाफ़ किया वग़ैरा वग़ैरा …..  किसी भी बात की शुरुआत के लिए कभी किसी इंसान (नबी या और किसी शख्स के ख़याल में नहीं आया) । यह महज़ उसके पीछे चलने वाले लोग हैं जो उसकी रहनुमाई के मातहत हैं ।

बछिया के राख से इंसान की इंसान कि ज़रुरत पूरी हुई जो कि नजासत से पाक होने की थी ।  इस तरह यह इंसानी ज़रुरत का निशान था । वह जानवर जो नज़र किया गया था मादा जानवर था ।  नजासत या नापाकी उस शर्मिंदगी की तरफ़ इशारा करती है जो गुनाह करने पर हमको एहसास होता है । वह कसूर नहीं जो अल्लाह के हुज़ूर हमको क़सूरवार ठहराता है ।  जब मैं गुनाह करता हूँ तो न सिर्फ़ मैं ने कानून को तोड़ा है बल्कि मैं मुंसिफ़ के सामने कुसूरवार भी हूं और मैं इस के लिए शरमिंदा हूँ और अफ़सोस करता हूँ ।  अब सवाल यह है कि अल्लाह किसतरह हमारे गुनाह की शर्मिंदगी को दूर करता है ।  सब से पहले वह हमारी शर्मसारी को ढंकने के लिए कपड़े देता है । पहले इंसान को अल्लाह ने चमड़े के कुरते बनाए थे कि उनकी शर्मिंदगी और नंगेपन को ढांक सके ।  उसके बाद तब से आदम की औलाद ने खुद को कपड़े से ढांकना शुरू किया ।  दर असल ऐसा करना बहुत ही फ़ितरती बात है ।  मगर यह बहुत ही कम ऐसा होता है कि हम रुक कर नहीं पूछते कि ऐसा क्यूँ है ? दूसरा यह मामला कि बछिए कि राख से नजासत से पाक होजाना जिन से हम नापाक होते हैं यानी वह चीज़ें जो हमको नापाक करती हैं वह बछिए का निशान था कि हमको पाक करे ।

22 तो फिर आओ, हम सच्चे हृदय, निश्चयपूर्ण विश्वास अपनी अपराधपूर्ण चेतना से हमें शुद्ध करने के लिए किए गए छिड़काव से युक्त अपने हृदयों को लेकर शुद्ध जल से धोए हुए अपने शरीरों के साथ परमेश्वर के निकट पहुँचते हैं।

इब्रानियों 10:22

ऊपर ब्यान किये गए अफ़आल (कारवाईयों) के मुताबिक़ कफ़फ़ारे के दिन कुर्बान किये जाने वाले नर बकरे सब से पहले अल्लाह के लिए थे इसलिए नर बकरे का इस्तेमाल होता था ।  दस अहकाम की निशानी के साथ हम ने नोट किया कि ना फ़र्मानी का ख़मयाज़ा बतोर लगातार मौतें होती थीं । (इबारत की जांच के लिए यहां किलिक करें) । अल्लाह मुंसिफ़ था (और आज भी है !) और मुंसिफ़ होने के नाते उसने मौत का तक़ाज़ा किया ।  नर बैल की क़ुर्बानी (मौत) सब बसे पहले अल्लाह के तक़ाज़े को पूरा करती थी कि हारून के घराने के गुनाहों का ख़मयाज़ा हो । फिर पहले नर बकरे की क़ुर्बानी (मौत) बनी इस्राईल के गुनाहों के लिए अल्लाह का तकाज़ा ख्म्याज़ा बतोर था । फिर बनी इस्राईल क़ौम को गुनाहों के लिए नज़र के बकरे को हारुन के ज़रिये बयाबान में छोड़ा जाता था और यह निशान था कि इस्राईली क़ौम का गुनाह कौम से अलग किया गया है ।

बनी इस्राईल की तारीख़ बताती है कि यह कुर्बानियां सरदार काहिन हारुन और उसकी औलाद के ज़रिये उनके ठहराए हुए मुल्क में एक हज़ार साल से ज़ियादा अरसे तक मनाया जा रहा था ।  यह दाऊद के ज़माने में भी था जब वह बादशाह बना और जब उसके बेटों ने हुकूमत की थी ; और जबकि कई एक अंबिया आए और उन्हों ने तंबीह भरे पैग़ामात दिए ; यहां तक कि हज़रत ईसा अल ।  मसीह के ज़माने तक यह कुर्बानियां यूँ ही जारी रहीं ।  मगर यह सब कुछ आने वाली नजात की महज़ एक निशानी थी ।  

सो मूसा और हारून के इन आख़री निशानों के साथ तौरात का ज़माना ख़त्म होने जा रहा था ।  अनक़रीब जानिशीन अंबिया आयेंगे और ज़बूरों में अल्लाह के पैग़ाम का आग़ाज़ होगा ।  मगर उस से पहले तौरात का एक आखरी पैग़ाम था । वह यह था कि हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने आने वाले एक और नबी की इतला’ दी जो उसी कि मानिंद होने वाला था ।  इस के साथ ही हज़रत मूसा बनी इस्राईल की मुसतक़बिल की बरकतों और लानतों को देख सकता था ।      

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